Thursday, July 14, 2011

छत्तीसगढ में एंग्लॊ इंडियन कॊटे से विधायक की गलत नियुक्ति




सूचना के अधिकार का छत्तीसगढ में अब तक का सबसे बडा खुलासा। सरकार के पास इस बात का जवाब नहीं है कि एंग्लॊ इंडियन कॊटे से गैर एंग्लॊ इंडियन कॊ विधायक कैसे बना दिया गया। एंग्लॊ इंडियन सदस्य और आरटीआई से जानकारी एकत्र करने वाली एरिक बैकमैन और पत्रिका के विशेष संवाददाता मृगेंद्र पांडेय कॊ धन्यवाद। पत्रिका समाचार पत्र कॊ भी धन्यवाद जॊ इतने गंभीर मुद्दे कॊ बडी ही संजीदगी से उठाया।

Thursday, June 30, 2011

सोनिया गांधी की यात्रा का खर्च 1850 करोड़

इतना खर्चा तो प्रधानमंत्री का भी नहीं है : पिछले तीन साल में सोनिया की सरकारी ऐश का सुबूत, सोनिया गाँधी के उपर सरकार ने पिछले तीन साल में जीतनी रकम उनकी निजी बिदेश यात्राओ पर की है उतना खर्च तो प्रधानमंत्री ने भी नहीं किया है ..एक सुचना के अनुसार पिछले तीन साल में सरकार ने करीब एक हज़ार आठ सौ अस्सी करोड रूपये सोनिया के विदेश दौरे के उपर खर्च किये है ..कैग ने इस पर आपति भी जताई तो दो अधिकारियो का तबादला कर दिया गया .
अब इस पर एक पत्रकार रमेश वर्मा ने सरकार से आर टी आई के तहत निम्न जानकारी मांगी है :
1. सोनिया के उपर पिछले तीन साल में कुल कितने रूपये सरकार ने उनकी विदेश यात्रा के लिए खर्च की है ?
2. क्या ये यात्राये सरकारी थी ?
3. अगर सरकारी थी तो फिर उन यात्राओ से इस देश को क्या फायदा हुआ ?
4. भारत के संबिधान में सोनिया की हैसियत एक सांसद की है तो फिर उनको प्रोटोकॉल में एक राष्ट्रअध्यछ का दर्जा कैसे मिला है ?
5. सोनिया गाँधी आठ बार अपनी बीमार माँ को देखने न्यूयॉर्क के एक अस्पताल में गयी जो की उनकी एक निजी यात्रा थी फिर हर बार हिल्टन होटल में चार महगे सुइट भारतीय दूतावास ने क्यों सरकारी पैसे से बुक करवाए ?
6. इस देश के प्रोटोकॉल के अनुसार सिर्फ प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ही विशेष विमान से अपने लाव लश्कर के साथ विदेश यात्रा कर सकते है तो फिर एक सांसद को विशेष सरकारी विमान लेकर विदेश यात्रा की अनुमति क्यों दी गयी ?
7. सोनिया गाँधी ने पिछले तीन साल में कितनी बार इटली और वेटिकेन की यात्राये की है ?
मित्रों कई बार कोशिश करने के बावजूद भी जब सरकार की ओर से कोई जबाब नहीं मिला तो थक हारकर केंद्रीय सुचना आयोग में अपील करनी पड़ी.
केन्द्रीय सूचना आयोग प्रधानमंत्री और उनके कार्यालय के गलत रवैये से हैरान हो गया .और उसने प्रधानमंत्री के उपर बहुत ही सख्त टिप्पडी की
1. केन्द्रीय सूचना आयोग ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के विदेशी दौरों पर उस पर खर्च हुए पैसे को सार्वजनिक करने को कहा है। सीआईसी ने प्रधानमंत्री कार्यालय को इसके निर्देश भी दिए हैं। हिसार के एक आरटीआई कार्यकर्ता रमेश वर्मा ने प्रधानमंत्री कार्यालय से सोनिया गांधी के विदेशी दौरों, उन पर खर्च, विदेशी दौरों के मकसद और दौरों से हुए फायदे के बारे में जानकारी मांगी है।
2. 26 फरवरी 2010 को प्रधानमंत्री कार्यालय को वर्मा की याचिका मिली, जिसे पीएमओ ने 16 मार्च 2010 को विदेश मंत्रालय को भेज दिया। 26 मार्च 2010 को विदेश मंत्रालय ने याचिका को संसदीय कार्य मंत्रालय के पास भेज दिया। प्रधानमंत्री कार्यालय के इस ढ़ीले रवैए पर नाराजगी जताते हुए मुख्य सूचना आयुक्त सत्येन्द्र मिश्रा ने निर्देश दिया कि भविष्य में याचिका की संबंधित मंत्रालय ही भेजा जाए। वर्मा ने पीएमओ के सीपीआईओ को याचिका दी थी। सीपीआईओ को यह याचिका संबंधित मंत्रालय को भेजनी चाहिए थी।
आखिर सोनिया की विदेश यात्राओ में वो कौन सा राज छुपा है जो इस देश के ” संत ” प्रधानमंत्री इस देश की जनता को बताना नहीं चाहते ? !

Wednesday, June 29, 2011

सूचना नहीं दी, जुर्माना

रायपुर। आरटीआई कार्यकर्ताओं को सूचना नहीं देने की शिकायत को मुख्य सूचना आयुक्त सरजियस मिंज ने गंभीरता से लिया। जनपद पंचायत मैनपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी पर सात हजार रूपए का अर्थदंड लगाया है। इतना ही नहीं उन्होंने अपील करने वाले को अपने सामने सूचना उपलब्ध कराई।

 जगदीश जैन ने जनपद पंचायत मैनपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और जनसूचना अधिकारी से मांगी थी। राज्य सूचना आयोग में अपील  के दौरान जन सूचना अधिकारी उपस्थित नहीं हुए और जानकारी भी नहीं दी। साथ ही कारण बताओ नोटिस का  जवाब नहीं दिया। आयोग ने सात हजार रूपए का जुर्माना ठोंका। साथ ही तत्काल अपीलार्थी को मांगी गई सूचना उपलब्ध कराई गई।

सरायपाली के खम्हारपाली परिवहन चेक पोस्ट के प्रभारी अधिकारी के खिलाफ पांच हजार रूपए का अर्थदंड पारित किया है। साथ ही दस दिन के भीतर सही जानकारी उपलब्ध करने के निर्देश दिए हैं। अपीलार्थी हाजी मोहम्मद रफीक ने चेक पोस्ट के जरिए वाहनों के विरूद्ध की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी थी, लेकिन उन्हें आधी-अधूरी और भ्रामक जानकारी उपलब्ध कराई।

Tuesday, June 28, 2011

कागजों में तालाब, जमीन पर सूखा

रायपुर। निस्तार की भूमि के कब्जों पर सख्त सुप्रीमकोर्ट को तालाबों की स्थिति के बारे में आधी-अधूरी जानकारी भेजी गई है। राज्य शासन ने सुप्रीमकोर्ट को जो शपथ-पत्र भेजा है, उसमें रायपुर समेत प्रदेश के ज्यादातर तालाब पूर्ववत और खरे दर्शाए गए हैं। लेकिन, सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत निकाले गए पटवारी रिकॉर्ड से इसकी पोल खुल गई। बानगी के तौर पर, रायपुर शहर के 31 सरकारी तालाबों में से 14 का पूरी तरह से अस्तित्व खत्म हो चुका है। बचे हुए आधे से ज्यादा तालाब पट चुके हैं। छह निजी तालाबों में से भी दो पट चुके हैं। राज्य के अन्य जिलों के तालाबों की हालत भी कमोबेश यही है।

जमीन के पुराने दस्तावेजों

और पटवारी के मौजूदा रिकॉर्ड में तालाबों पर कब्जों की स्थिति में बड़ा अंतर है। भू-माफियाओं ने तालाबों को खत्म करने का कुत्सित प्रयास किया। फिर भी शासन उनके बचाव में खड़ा है। सुप्रीमकोर्ट को भेजे गए ब्योरे में गलत जानकारी दी गई है।

शासन ने 1934 और उसके बाद के पुराने रिकॉर्ड के आधार पर तालाबों की जानकारी भेजी है। जबकि आरटीआई के तहत हाल ही में मिली जानकारी के अनुसार आधे से ज्यादा तालाब अब मौके पर नहीं है। इसकी वजह से तालाबों को पाटकर कॉलोनी, कॉम्प्लेक्स अथवा झुग्गी बसाने वालों को साफ बच निकलने का मौका मिल जाएगा।

राजस्व अमला बेचैन

कोर्ट के संज्ञान लेने के कारण सभी राज्यों का राजस्व अमला बेचैन है। जब-जब भी कोई राज्य अपना शपथ-पत्र कोर्ट में प्रस्तुत करता है तब राज्य के प्रतिनिधि के तौर पर एक अधिकारी को वहां हाजिरी लगानी होती है। हालांकि, राज्य की ओर से अब भी कुछ जिलों की जानकारी नहीं भेजी गई। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ की ओर से सौंपे गए शपथ-पत्र में ढाई लाख एकड़ जमीन पर कब्जे स्वीकार किए गए हैं। साथ ही इन्हें वापस कब्जामुक्त करने की कारगर नीति तैयार की जा रही है।

लगाएंगे याचिका

सामाजिक संगठन इस मामले में पहल करेंगे। पट चुके तालाबों को कब्जामुक्त कराने के सम्बंध में हाईकोर्ट में याचिका लगाएंगे। संगवारी संस्था के राकेश चौबे का कहना है कि निस्तार की जमीन को भू-माफिया के चंगुल से मुक्त कराना जरूरी है।

तालाबों को पाटे जाने के सम्बंध में फिजिकल वैरिफिकेशन कराया जाएगा। जो कब्जा अनधिकृत पाया जाएगा, उसको हटाने अथवा तालाबों को उनके वास्तविक स्वरूप में लाने की प्रक्रिया की जाएगी।
सुनील कुजूर, प्रमुख सचिव, राजस्व

गोविंद ठाकरे (राजस्थान पत्रिका रायपुर से साभार)

Sunday, June 26, 2011

आरटीआई कार्यकर्ता की हत्या

नियामत अंसारी अपने क्षेत्र में मनरेगा में धांधली उजागर की थी.
झारखंड के लातेहार ज़िले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार योजना यानि मनरेगा को लागू करने के लिए काम कर रहे एक आरटीआई कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई है.

नियामत अंसारी नाम के इस कार्यकर्ता को घर से निकालने के बाद पीटा गया जिसके बाद घायल नियामत अली के अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी मौत हो गई.
ख़बरों के अनुसार नियामत अंसारी जानेमाने अर्थशास्त्री जॉं ड्रेज़ के क़रीबी सहयोगी थे.
ड्रेज़ उन लोगों में से एक हैं जिन्होंने मनेरगा का खाका तैयार किया था.
सरकार की महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार योजना ग्रामीण क्षेत्रों में ग़रीबों को एक साल में सौ दिन का काम देने की गांरटी देती है.

कहा जा रहा है कि अंसारी और ड्रेज़ ने मिलकर लातेहार के रांकीकाला इलाक़े में मनेरगा में धांधली का पर्दाफ़ाश किया था जिसके बाद मेनिका के पूर्व बीडीओ कैलाश साहू से कथित तौर पर दो लाख रुपए बरामद किए गए थे.
इस बरामदगी के बाद पुलिस में एफ़आईआर दर्ज करवाया गया था.

कुछ स्थानीय अख़बारों में नियामत अंसारी की हत्या के पीछे वामपंथी चरमपंथियों का हाथ बताया जा रहा है.

नंबरदार के डर से गांव छोड़ा!

फतेहाबाद

किरढ़ान गांव के एक आरटीआई कार्यकर्ता जीतराम को सूचना के अधिकार के तहत जानकारी लेना महंगा पड़ गया। उसका परिवार गांव छोडऩे पर मजबूर हो गया है। अब जीत राम घर में अकेला रह रहा है। उसकी पत्नी बिमला, पुत्री अलका, पुत्र अंगद व पुत्रवधु सुमित्रा इतने सहमें हुए हैं कि रिश्तेदारों के यहां छिप रहे हैं। गांव के लोग कुछ भी बोलने से गुरेज कर रहे हैं। सरपंच दोनों पक्षों का निजी मामला बताते हुए खुलकर बोलने को तैयार नहीं हैं।

गांव में मिट्टी के बर्तन बना कर अपने परिवार का गुजारा करने वाले जीतराम ने सूचना के अधिकार के तहत कुछ जानकारियां लीं, जिसके बाद प्रशासन को शिकायत दी। प्रशासन ने शिकायत पर गनंबरदार भगतराम के कब्जे से तीन एकड़ पंचायती जमीन छुड़वा ली थी। इस जमीन पर 30 वर्षों से भगतराम ने कब्जा कर रखा था। जीतराम ने कहा कि कब्जे से पंचायती आय को जो नुकसान हुआ, उसकी भरपाई भी भगतराम से कराई जाए। भगतराम ने अपने मकान के साथ लगते बिजली विभाग के एक प्लाट व इमारत को भी घरेलू कार्यों के लिए इस्तेमाल कर रहा था। इसकी भी जीत राम ने सूचना के अधिकार के तहत सारी जानकारी मांग ली, जिसके बाद से जीत राम व भगतराम में तनातनी चल रही है।

जीतराम के अनुसार कार्रवाई से खफा भगत राम ने गत 6 फरवरी को उस पर कुछ लोगों के साथ जानलेवा हमला भी कराया था। तब गांव के बस अड्डे के पास बने शराब के ठेके पर काम करने वाले अशोक कुमार व पवन कुमार ने उसे बचाया था। झगड़े की शिकायत थाने में की तो थाना प्रभारी ने भी सुनवाई नहीं की। वह एसपी को भी शिकायत कर चुका है। उसने बताया कि उसके परिवार को नंबरदार धमकियां दे रहा है। असुरक्षित महसूस करते हुए पत्नी बिमला देवी, पुत्री अलका, पुत्र अंगद तथा पुत्रवधु सुमित्रा गांव छोड़ चुके हैं।

आरोप बेबुनियाद

मामले को लेकर मैं कानूनी तरीके से लड़ाई लड़ूंगा। जीतराम पर मैने कोई हमला नहीं किया। हमले और धमकी के आरोप सरासर बेबुनियाद हैं। बेवजह मुझे बदनाम किया जा रहा है। ""

भगतराम, नंबरदार

मैं क्या कर सकता हूं

जीत राम के परिजनों ने गांव छोड़ा है या नहीं, मुझे कैसे पता चलेगा। गांव में साढ़े चार हजार वोट हैं। मैं किस-किस का ध्यान रखूंगा। झगड़े के डर से कोई घर छोड़ चला जाए तो मैं क्या कर सकता हूं। ""

संपत भादू, सरपंच, गांव किरढ़ान

मामले की जांच आईओ रणधीर सिंह कर रहे हैं। झगड़ा गांव के बस अड्डे पर हुआ था। जीत राम के हक में किसी ने भी गवाही नहीं लिखवाई है। निष्पक्ष कार्रवाई करेंगे।""

निर्मल सिंह, थाना प्रभारी, भट्टू

आरटीआई के इस्तेमाल पर पत्रकार को तहसीलदार ने फंसाया

: फर्जी केस दर्ज कराया : हाथ पैर तुड़वाकर जेल भेजने की दी धमकी :
सूचना है कि पत्रकार मनोज तिवारी निवासी बचैया बहोरीबंद जिला कटनी ने
सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत एक आवेदन 2 अप्रैल 2011 को बहोरीबंद
तहसीलदार को भेजा था. आवेदक ने वर्ष 2008 से वर्ष 2010-2011 तक बहोराबंद
तहसील की समस्त पंचायतों के गरीबी रेखा एवं अति गरीबी रेखा के अन्तर्गत
जीवन यापन करने वाले हितग्राहियों की सूची उपलब्ध कराने की मांग की थी.

आवेदक मनोज तिवारी ने बताया कि उक्त आवेदन
की पेशी तहसीलदार ने 19 अप्रैल को मुकर्रर की थी और जब वह पेशी पर उपस्थित
हुआ तो तहसीलदार ने दूसरे दिन 20 अप्रैल को बुलाया. किन्तु मांगी गई
जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई. बताया जाता है कि बहोरीबंद तहसील की ग्राम
पंचायत बचैया में इस तहसीलदार ने कई धनी लोगों को गरीबी रेखा की सूची में
डाल दिया है. आवेदक ने इसकी शिकायत कटनी जिला कलेक्टर को प्रेषित की है
जिसकी जांच शुरू हो गई है.

3 मई को आवेदक बहोरीबंद तहसीलदार से उक्त
जानकारी के संदर्भ में बात करने पहुंचा तो वह आवेदक को देखते ही तिलमिला
उठा और गुण्डागर्दी पर उतर आये. उन्होंने पत्रकार को हाथ पैर तुड़वाकर जेल
भेजने की धमकी दी. बाद में बौखलाये तहसीलदार हेमकरण धुर्वे ने पत्रकार पर
फर्जी केस दर्ज करवा दिया. तहसीलदार की धमकी से भयभीत पत्रकार ने इसकी
शिकायत उच्चाधिकारियों, थाना प्रभारी एवं शिवराज सिंह चौहान के यहां की.
पत्रकार ने हलफनामा भेजकर आरोपी हेमकरण ध्रुर्वे तहसीलदार बहोरीबंद के
खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. पत्रकार ने शपथ पत्र में कहा है कि
ध्रुर्वे जानमाल पर हमला करवा सकता

पुलिस पर आरोपियों को बचाने का आरोप

बाड़मेर। आरटीआई कार्यकर्ता मंगलाराम मेघवाल के हाथ पैर तोड़ने एवं इन्द्रा मेघवाल के रहवासी मकान को फर्जी पट्टे से कब्जे मे लेने की कोशिश करने के मामले नामजद आरोपियों को पुलिस अधीक्षक पर बचाने का आरोप दलित अत्याचार निवारण समिति ने लगाया है। समिति के संयोजक ने बताया कि कलक्ट्रेट के बाहर 24 दिन से उक्त दोनो मामलों को लेकर धरना दिया जा रहा है। स्वयं पीडित अपने परिजनों सहित धरने पर है, लेकिन पुलिस अधीक्षक आरोपियों को संरक्षण दे रहे हंै।

पुराने कार्य करने का आरोप
दलित अत्याचार निवारण समिति ने जिला कलक्टर को ज्ञापन देकर बताया कि सामाजिक अंकेक्षण दौरान विशेष जांच दल ने बामणोर ग्राम पंचायत में बिना काम करवाए भुगतान उठाने के जो मामले उजागर किए थे उसमें कार्यवाही से बचने के लिए सरपंच रातो रात अधूरे कार्यो को पूरा करवाने की कार्यवाही कर रहा है। उन्होंने सरपंच को आनन फानन में काम करवाने से रोकने एवं तत्काल एफआईआर दर्ज करवाने की मांग कलक्टर से की।

बगैर राष्‍ट्रभाषा के है गांधी का देश

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि राष्ट्रभाषा के बगैर राष्ट्र गूंगा होता है. पर, आजादी के 62 सालों बाद आज भी यह देश गूंगा ही है. सूचना अधिकार (आरटीआई) से मिली जानकारी के अनुसार संविधान में राष्ट्रभाषा का कोई उल्लेख नहीं है. केंद्र की आधिकारिक भाषा हिंदी जरूर है. आरटीआई कार्यकर्ता मनोरंजन रॉय ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से पूछा था कि इस देश की राष्ट्रभाषा क्या है और हिंदी-अंग्रेजी व संस्कृत में से देश की आधिकारिक भाषा क्या है. केंद्रीय गृह मंत्रालय के उपनिदेशक डॉ. सरोज कुमार त्रिपाठी ने रॉय को जो लिखित जवाब भेजा है, उसके अनुसार संविधान में राष्ट्रभाषा का कोई उल्लेख नहीं है. रॉय के दूसरे सवाल के उत्तर में बताया गया है कि भारतीय संविधान की धारा 324 के तहत हिंदी केंद्र सरकार की आधिकारिक भाषा है.

भारत, इंडिया या हिंदुस्तान : भाषा के हिसाब से इस देश का नाम बदल जाता है. हिंदी में इस देश का नाम भारत, अंग्रेजी में इंडिया और उर्दू में हिंदुस्तान हो जाता है. रॉय ने इसी आरटीआई में यह भी सवाल किया था कि इस देश का आधिकारिक नाम क्या है? इसके लिखित जवाब में उन्हें बताया गया कि इस विभाग (गृह मंत्रालय) के पास इस बारे में कोई सूचना उपलब्ध नहीं है. रॉय कहते हैं कि आश्चर्य की बात है कि हर आदमी का निक नेम चाहे जितना हो, पर उसे एक आधिकारिक नाम रखना पड़ता है और इसमें किसी तरह का फेरबदल करने पर कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी नहीं पता कि इस देश का ऑफिसियल नाम क्या है. रॉय अब अपने इस सवाल का जवाब खोजने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले हैं.
 
हां, सचमुच राष्ट्र गूंगा ही है : महाराष्ट्र राज्य हिंदी अकादमी के कार्याध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार नंदकिशोर नौटियाल इस स्थिति पर दु:ख जताते हुए कहते हैं कि जब देश के संविधान में राष्ट्रभाषा का कोई उल्लेख नहीं है तो यह राष्ट्र गूंगा ही है. यह दुखद स्थिति है. सरकारों में इच्छाशक्ति के अभाव में हिंदी को उसका स्थान नहीं मिला. जबकि इससे केवल हिंदी का नुकसान नहीं हुआ. प्रादेशिक भाषाओं को भी उतना ही नुकसान उठाना पड़ा है. जहां तक देश के आधिकारिक नाम का सवाल है तो संविधान में कहा गया है कि 'भारत इज इंडिया' (भारत इंडिया है). पर आश्चर्य की बात है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय को इसकी जानकारी नहीं है.
 
व्यवहारिक धरातल पर हिंदी बन चुकी है राष्ट्रभाषा मुंबई विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व विभाग अध्यक्ष डॉ. रामजी तिवारी कहते हैं कि संविधान भले ही हिंदी को राष्ट्रभाषा न माने, पर सही मायने में व्यावहारिक धरातल पर हिंदी राष्ट्रभाषा बन चुकी है. महात्मा गांधी ने तो हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित कर ही दिया था. नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने भी कहा था कि देश आजाद होने पर हिंदी ही राष्ट्रभाषा होगी. जबकि ये दोनों गैर हिंदीभाषी थे, लेकिन देश के लिए हिंदी की अहमियत समझते थे. डॉ. तिवारी सवाल करते हैं कि यदि हिंदी केंद्र की आधिकारिक भाषा है. इसके बावजूद वहां भी सारे कामकाज अंग्रेजी में क्यों होते हैं?
 
देश में 15 राष्ट्रभाषा है : पूर्व आईपीएस अधिकारी व वरिष्ठ अधिवक्ता वाई.पी. सिंह कहते हैं कि सरकारी एजेंसियां आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी देने में लापरवाही करती रहती हैं. गृह मंत्रालय को सही जानकारी नहीं है. यह आश्चर्य की बात है. संविधान में लिखा गया है कि देश में 14 राष्ट्रभाषा है. बाद में इसमें सिंधी को भी जोड़ा गया, जिससे यह संख्या 15 हो गई. जहां तक देश के आधिकारिक नाम पर सवाल है तो संविधान में इसका भी उल्लेख है.

Saturday, June 25, 2011

पोरबंदर में आरटीआई एक्टिविस्ट पर जानलेवा हमला

पोरबंदर। पोरबंदर में आज एक आरटीआई एक्टिविस्ट पर जानलेवा हमला हुआ है। आरटीआई एक्टिविस्ट का नाम भगु देवानी है। हमलावरों की तलाश में पुलिस जुटी है। देवानी को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हमलावरों की पहचान अब तक नहीं हो सकी है लेकिन भगु देवानी को एक स्थानीय नेता पिछले काफी दिनों से धमकी दे रहा था।

दो अज्ञात युवकों ने 65 वर्षीय वकील और आरटीआइ कार्यकर्ता भग्नु देवानी को ऑफिस जाते वक्त चाकू घोंपकर बुरी तरह जख्मी कर दिया। देवानी पिछले कई वर्ष से पोरबंदर में शराब के अवैध कारोबार से जुड़े लोगों, अवैध खनन और बिल्डर्स लॉबी के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। देवानी पर हमले के पीछे भाजपा नेता बाबू बोखिरिया का हाथ बताया जा रहा है। राज्य में इससे पूर्व 21 जुलाई, 2010 को आरटीआइ कार्यकर्ता अमित जेठवा की अहमदाबाद में हाई कोर्ट के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जेठवा भारत में शेरों के एकमात्र अभयारण्य गिर में अवैध खनन के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।

Friday, June 24, 2011

RTI activist Akhil Gogoi arrested in Guwahati


Guwahati: Police on Friday arrested RTI activist and leader of Krishak Mukti Sangram Samiti (KMSS) Akhil Gogoi from the Guwahati Press Club in connection with the Dispur clash that left three killed and over 30 injured. He has been charged with 10 cases of rioting, arsoning, damaging public property and illegal meeting. 

The Assam government is also considering slapping NSA against him. A protest rally led by Akhil Gogoi in Dispur turned violent on Wednesday, during which at least three people, including a nine-year-old child, died in police action. 
 
The incident happened in Dispur near the state secretariat when activist Akhil Gogoi was leading a protest against the eviction drive by the Assam government. 

The police had to resort to tear-gas shells to disperse the crowd. Five journalists, among others were injured in the clashes. 

Thousands joined Akhil Gogoi in his protest against the eviction drive by the Assam government, following which the police first fired in air to disperse the crowd and then fired into the crowd.
The police, however, are in denial of having fired in the crowd.

पाठ्य पुस्तक निगम नहीं दे रहा आरटीआई में जानकारी

फेसबुक से मिले अपडेट के आधार पर
Varun Jha
छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम में सूचना के अधिकार अधिनियम की धज्जियां उड़ाई जा रही है, आलम यह है कि निर्धारित समय बीतने के बाद भी आवेदक को सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती। विभागीय उच्चाधिकारियों का व्यवहार भी आवेदक के साथ संदेहास्पद है।
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Aish Agrawal thats the cg govt
Thursday at 15:26 · Like · 1 person
Ardhendu Mukherjee ye koi nai baat nahi hai..cg mey lagbhag har vibhag ka yahi haal hai..kisi ko kisi baat ka dar nahi hai aur na hi sarokar..sarkar ko isse koi fark nahi padta kyonki 10 saal chala liya aur kismat ne saath diya to phir chala lenge..inki aatma hi mar chuki hai...
Thursday at 17:01 · Like · 1 person
Varun Jha मुखर्जी जी, अति का अंत होता है। इस तथ्य को हमें नहीं भूलना चाहिए। आपका कहना पूरी तरह सही है। आम जनता को मूर्ख समझा जा रहा है।
Thursday at 19:45 · Like · 1 person
Ravi Nishad sahi baat hai varun ji
15 hours ago · Like · 1 person
suchna ka adhikar aam admi ko takatwar banane ke mansha se lagu kiya gaya hai par adhiktar iska upyog chand dhandhebaj log apne vaktigat labh ke liye kar rahe hai ya fir sarkari log ya usse jude log ek dusre ki tang khichne ke liye sunchna...See more
13 hours ago · Like · 4 people
Ritesh Jain main subhash mishra ji ki baat se sehmat hu
12 hours ago · Like
Altaf Husain varun aapko pahle vahan jaa kar milna chahiye aur vastusthiti se avgat hoiye..?????subhash ji ak suljhhe huye jan sampark adhikari rahe hai ....isliye unki baato me dum hai...
12 hours ago · Like
Varun Jha मिश्रा जी, आपने बिल्कुल सही कहा है। जिस प्रकार एक खराब मछली पूरे तालाब को प्रदूषित कर देती है, ठीक उसी तरह सूचना का अधिकार अधिनियम का हाल हो रहा है। हुसैन जी और रितेश जी आपका कहना भी सही है, लेकिन इस चूक को सुधारना होगा। लोगों को सावधान रहने की जरूरत है कि कोई उनका गलत इस्तेमाल कर ले।
12 hours ago · Like
Altaf Husain isliye to bhai aap mishra ji ki baat maano aur vahan milo yaha likhne se aap ko kuchh nahi milega....
12 hours ago · Like · 1 person
Varun Jha संभवतः मिश्रा जी मेरा स्वभाव जानते है, आखिर मैं उनका छोटा भाई जो हूं, जब उनसे मिलने का मन होगा, तो उनसे आदेश नहीं लूंगा, सीधे पहुच जाउँगा।
12 hours ago · Like
Girish Mishra Varun Bhai hamare ghar me chhote bhai itni himakat nahi karte..fir bhi sachchai ka samna karne ki jarurat hai aur rishte itne patle nahi hone chahiye ki kisi swarthvash tut jaye...jaha tak aapka suchna ka adhikaar hai puri tassali se use kariye...kahi kuch mile to bataiyega aur nahi mile to bhai bolkar sharminda mat kijiyega...
10 hours ago · Like

Thursday, June 23, 2011

छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन २७ - २८ जून को कोरबा में

साथी जिंदाबाद !
छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन  द्वारा दिनांक २७ - २८ जून २०११ को कोरबा जिले के पोरिपोरा ब्लाक के  ग्राम मदनपुर में  पैसा कानून पर सम्मलेन का आयोजन किया जा रहा हैं  जिसमे मुख्य अतिथि के रूप में डॉ ब्रह्मदेव शर्मा  जी शामिल होंगे l  दिनांक २७ जून  को पैसा कानून पर चर्चा और २८ जून को मदनपुर में विशेष ग्राम सभा का आयोजन कर पैसा कानून के मुताबिक प्रस्ताव केंद्र और राज्य सरकार को  अनुपालन के लिए भेजा जायेगा l आप कार्यक्रम में सादर आमंत्रित हैं l आमंत्रण पत्र मेल के साथ संग्लन हैं कृपया देख लेवे l
आपका
आलोक शुक्ला
छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन
मोब 9977634040

Wednesday, June 22, 2011

बिस्सा को RTI के सदुपयोग पर राष्ट्रीय एवार्ड

छत्तीसगढ प्रदेश कांग्रेस के सचिव एवं प्रवक्ता राजेश बिस्सा सूचना के अधिकार कानून का व्यापक जनहित में उपयोग करने वाले देश के दूसरे सर्वश्रेष्ठ नागरिक चुने गए है.

मेगासेसे पुरस्कार से सम्मानित प्रो.अरविन्द केजरीवाल द्वारा टाटा संस के सहयोग से आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में सूचना के कानून का व्यापक जनहित में इस्तेमाल करने वाले 20 सर्वश्रेष्ठ लोगो का चयन किया गया जिसमें श्री बिस्सा दूसरे स्थान पर रहे.

बिस्सा का चयन उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायधीश जे. एस.वर्मा, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त श्री लिंगदोह ,संविधान विशेषज्ञ श्री नरीमन, इन्फोसिस के प्रमुख नारायण मूर्ति सहित प्रतिष्ठित 11लोगो की ज्यूरी द्वारा किया गया. दूसरा स्थान पाने वाले बिस्सा सर्वश्रेष्ठ 20 लोगो में पहले राजनीतिक व्यक्ति है. नई दिल्ली में कल एक दिसम्बर को एक गरिमायुक्त समारोह में बिस्सा को आरटीआई एवार्ड तथा एक लाख रूपये की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी.

बिस्सा को इस राष्ट्रीय एवार्ड मिलने पर प्रदेश युवक कांग्रेस के सचिव संजय सिंह ठाकुर समेत बडी संख्या में कांग्रेसजनों एवं अन्य वर्गो के लोगो ने बधाई देते हुए कहा है कि उन्होने छत्तीसगढ का नाम रोशन किया है.

आरटीआई कार्यकर्ता को जंजीर से बांधा

रायपुर। छत्तीसगढ़ की बीजेपी सरकार विरोध की आवाज को कैसे दबाती है, उसकी एक खौफनाक तस्वीर सामने आई है। अस्पताल में भर्ती आरटीआई कार्यकर्ता रमेश अग्रवाल को जंजीर से बांध कर रखा गया है। उन्हें 28 मई को गिरफ्तार किया गया था। जिंदल पावर प्लांट के खिलाफ आवाज उठाने की उन्हें ये कीमत चुकानी पड़ रही है। दरअसल रायपुर के एक अस्पताल में भर्ती आरटीआई कार्यकर्ता रमेश अग्रवाल को जंजीर से बांध कर रखा गया है। उनके हाथ में हथकड़ी लगी है।

आर.टी.आई. प्राइवेट सेक्टर पर भी लागू हो

{ वर्ष-५, अंक-१६ , २७ जनवरी से २ फरवरी २०१० तक वफादार साथी में प्रकाशित }

महात्मा गांधी ने देश को स्वतंत्रता दिलाई परन्तु अभी तक प्रशासन में अपना तंत्र (स्व-तंत्र) लागू नहीं हुआ, अंग्रेजों के जमाने के कानून आज भी चल रहा है जिसके कारण अब भी शोषण गोरे अंग्रेज के बाद काले अंग्रेजनुमा कुछ नौकरशाह ( वर्तमान आईपीएस, आईएएस, आईएफएस) कर रहे हैं। ईमानदार नौकरशाह उपेक्षित एवं अपमानित स्थिति में सिर झुकाकर बेबसी से नौकरी कर रहे हैं आर.टी.आई. एक्ट लागू होने से प्रशासन में मात्र एक प्रतिशत पारदर्शिता आई है ९९ प्रतिशत अभी भी षडयंत्र के तहत कार्य चल रहा है जब तक निजी क्षेत्रों में भी आरटीआई एक्ट प्रभावशील नहीं होगा तब तक किसी देश में भ्रष्टाचार मिट नहीं सकता, क्योंकि प्रशासन के धन को लूटने वाले भ्रष्ट अधिकारी एवं बेईमान व्यापारी भी रहते हैं। बेईमान व्यापारियों के चलते ईमानदार व्यापारी दीवालिया हो जाता है।

उदाहरण के तौर पर उदाहरण के तौर पर यदि एक बिल्डिंग निर्माण का ठेका निर्धारित दर से ३० प्रतिशत कम पर ठेकादार को मिलता है तो हम ये जानने का हक नहीं रख नहीं पाते की उस ठेकेदार ने कैसे रोज बढती मंहगाई में भी ३० प्रतिशत से कम पर कार्य किया। आम जनता को प्रत्येक व्यापारी के बैंक खाते, जमा खर्च, आवक्-जावक को पारदर्शी किया जाएगा तभी मुनाफाखोरी, कालाबाजारी बंद होगा इसलिए पान ठेला, किराना दुकान, आटा चक्की से रोलिंग मिल, सीमेंट कारखाना पावर प्लांट सभी में आरटीआई एक्ट लागू हो।

इसके लिए सभी राजनैतिक पार्टियों के नेताओं को राष्ट्रहित में तत्काल निर्णय लेना चाहिए, वहीं जागरुक नागरिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थानों को जमकर आंदोलन कर हल्ला बोल करना चाहिए, जब तक नागरिक संगठनों द्वारा उग्र आंदोलन नहीं किया जाएगा तब तक आर.टी.आई. एक्ट प्राइवेट सेक्टर पर लागू नहीं होगा, क्योंकि भ्रष्ट नौकरशाह बेईमान व्यापारियों एवं उद्योगपतियों के रक्षक हैं बडे घोटाले में इनकी भागीदारी रहती है। प्राइवेट सेक्टर पर आरटीआई लागू होने से बाहुबलियों, देहव्यापारी, नशा के सौदागर, अपराधी की काली कायनात भी जनता के सामने उजागर होगी, कैसे उक्त लोग कम समय में अकूत संपत्ति हासिल कर लिए और जनता को मुंह चिढाले घूम रहे हैं।

न्यायपालिका से जुडे हुए ईमानदार न्याधीश अपने आप चिन्हित होंगे। अक्सर यह देखा गया है कि रसूखदार मंत्री, नौकरशाह अपने नजदीकी रिश्तेदार, चाटुकार कार्यकर्ता अपने सेवादारों को नजायज तरीके से करोडों रुपये का लाभ पहुंचाते हैं चूंकि प्राईवेट दुकानों में आरटीआई एक्ट लागू नहीं है इसलिए कोई यह नहीं पूछ पाता है कि कम समय में इतना धन कहां से आया। कल तक साइकल में चलने वाला कैमे पांच सितारा होटल का मालिक बन गया। इन सबका खुलासा उसी समय होगा जब आरटीआई एक्ट प्राइवेट सेक्टर पर भी लागू हो, यदि डा. रमन सिं चाहें तो एक विधेयक लाकर राज्य में नया आरटीआई एक्ट कानून विधानसभा में पेश कर कानून बना सकते हैं जिससे प्रदेश में भ्रष्टाचार खत्म हो जावेगा।

--अनिल अग्रवाल--

फोन से सूचना उपलब्ध कराने की सरकारी सेवा

बिहार सरकार ने लोगों तक आसानी से सूचना पहुंचाने के लिए काॅल सेंटर की व्यवस्था की है। जिसे ‘जानकारी’ नाम दिया गया है। देश में यह अनूठा और इकलौता प्रयोग है। इस सेवा के माध्यम से कोई भी व्यक्ति कहीं से भी महज एक फोन नम्बर डायल कर सूचनाएं हासिल करने की प्रक्रिया शुरू कर सकेगा। सूचना प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले को फोन नम्बर 155311/15331 डायल करना होगा। यह नंबर नम्बर राज्य सरकार के काॅल सेन्टर ‘‘जानकारी’’ का है। इस नम्बर पर फोन करते ही 10 रूपये की राशि फोनकर्ता के टेलीफोन बिल में जुट जायेगी यानि 10 रुपये बैंलेस खाते से कट जाएगा। जानकारी सेन्टर में फोन करते ही सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सूचना मुहैया करने की प्रक्रिया शुरू हो जायेगी।
काॅल सेन्टर में फोन कर आप अपनी शिकायत या सूचना हासिल करने संबंधी आवेदन मौखिक दर्ज करा पाएंगे। काॅल सेन्टर इसे लिखित रूप में दर्ज कर संबंधित विभाग को कारवाई के लिए भेज देगा। सूचना नोट होते ही काॅल सेन्टर फोनकर्ता को आवेदन संख्या भी देगी। जिसे आपको नोट कर रखना होगा। प्रक्रिया पूरी होने के बाद आपको यह भी बता दिया जायेगा कि आवेदन को संबंधित विभाग के पास कारवाई के लिए भेजा जा रहा है। इससे पहले फोनकर्ता अपना टेलीफोन नम्बर और पूरा पता काॅल सेन्टर में लिखा देगें ताकि 35 दिनों के भीतर सूचना उपलब्ध होते ही काॅल सेन्टर इसकी जानकारी फोनकर्ता को दे सके। ऐसा नही होने पर 35 दिनों के बाद फोनकर्ता को दोबारा फोन करना होगा। इस बार फोन काॅल अपील माना जायेगा। इसके लिए भी टेलीफोन शुल्क के रूप में 10 रूपये की राशि बीएसएनएल फोनकर्ता से वसूलेगा। इस अपील पर 20 दिनों के भीतर कारवाई होगी।
पहली अपील के बावजूद फोनकर्ता को फिर कोई शिकायत हो तो दूसरी बार अपीलीय फोन कर सकेंगे। जिसके लिए 10 रूपये शुल्क भुगतान करना होगा। इस बार की अपील सूचना आयोग के पास कारवाई के लिए भेजी जायेगी। जहां सुनवाई के बाद आयोग अपना निर्णय सुनायेगी। इसमें भी 20 दिनांे का समय लगेगा। इस दौरान फोनकर्ता एक अन्य फोन नम्बर 155310 पर फोन कर इस संबंध में अन्य कोई भी जानकारी हासिल कर सकेंगे। इसके लिए फोनकर्ता को 10 रूपये का भुगतान नहीं करना पडे़गा। बहरहाल, बिहार सरकार ने जन जन तक सूचना पहुंचाने के लिए कालसेंटर की व्यवस्था कर दी है अब आप पर है कि जनता इस सेवा का कितना इस्तेमाल किस तरह से करती है। इससे बढि़या,सस्ता और सुविधाजनक माध्यम दूसरा कोई हो नहीं सकता।